इंडोनेशिया में चलेगा अपना रुपया, RBI ने कर लिया एग्रीमेंट

अब इंडोनेशिया में पेमेंट करना और आसान हो जाएगा क्योंकि करेंसी बदलने की झंझट नहीं रह जाएगी और रुपये में भी पेमेंट कर सकेंगे। इसे लेकर RBI गवर्नर शक्तिकांत दास (Shaktikanta Das) और इंडोनेशिया के केंद्रीय बैंक के प्रमुख पेरी वारजियो ने एक मेमोरंडम ऑफ अंडरटेकिंग (MoU) पर साइन किए हैं। जानिए क्या है इस सौदे में और इससे पहले किस देश के साथ ऐसा एग्रीमेंट हो चुका है?

अपडेटेड Mar 07, 2024 पर 4:06 PM
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RBI की रिलीज के मुताबिक इंडोनेशिया के केंद्रीय बैंक के साथ जो एमओयू हुआ है, उसके तहत सभी मौजूदा ट्रांजैक्शंस, कैपिटल अकाउंट ट्रांजैक्शंस और बाकी सभी आर्थिक और वित्तीय ट्रांजैक्शंस होंगे, जिसे लेकर दोनों के बीच सहमति बनी है।

अब इंडोनेशिया में पेमेंट करना और आसान हो जाएगा क्योंकि करेंसी बदलने की झंझट नहीं रह जाएगी और रुपये में भी पेमेंट कर सकेंगे। इसे लेकर RBI गवर्नर शक्तिकांत दास (Shaktikanta Das) और इंडोनेशिया के केंद्रीय बैंक के प्रमुख पेरी वारजियो ने एक मेमोरंडम ऑफ अंडरटेकिंग (MoU) पर साइन किए हैं। आरबीआई ने जो रिलीज जारी की है, उसके मुताबिक इस एमओयू के तहत दोनों देशों के बीच आपसी लेन-देन में भारतीय रुपये (INR) और इंडोनेशियन रुपिया (IDR) के इस्तेमाल को बढ़ावा देने का फ्रेमवर्क तैयार किया जाएगा।

इस एग्रीमेंट से होंगे ये फायदे

आरबीआई की रिलीज के मुताबिक इस एमओयू के तहत सभी मौजूदा ट्रांजैक्शंस, कैपिटल अकाउंट ट्रांजैक्शंस और बाकी सभी आर्थिक और वित्तीय ट्रांजैक्शंस होंगे, जिसे लेकर दोनों के बीच सहमति बनी है। इस फ्रेमवर्क से आयातकों और निर्यातकों को एक बड़ा फायदा ये होगा कि वे अपनी घरेलू करेंसी में इनवॉइस बना सकेंगे और घरेलू करेंसी में पेमेंट कर सकेंगे। इससे इंडियन रुपये और इंडोनेशियल रुपिया के लिए फॉरेन एक्सचेंज मार्केट भी तैयार होगा। स्थानीय करेंसी के इस्तेमाल से लेन-देन के सेटलमेंट में समय भी कम लगेगा।


पिछले साल UAE के साथ भी बनी थी बात

केंद्रीय बैंक RBI ने पिछले साल जुलाई में यूएई के केंद्रीय बैंक के साथ दो एमओयू पर साइन किया था। ये एमओयू दोनों देशों के बीच स्थानीय करेंसी के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के साथ-साथ पेमेंट और मैसेजिंग सिस्टम्स के इंटरलिंकिंग में सहयोग के लिए हुए थे। इसके तहत यूएई में रुपये और यूएई के दिरहम के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए लोकल करेंसी सेटलमेंट सिस्टम (LCSS) का प्रावधान किया गया। जुलाई 2023 में जारी RBI की रिलीज के मुताबिक इस एमओयू के तहत सभी करेंट अकाउंट ट्रांजैक्शंस और को लाया गया और ऐसे सभी कैपिटल अकाउंट ट्रांजैक्शंस को लाया गया, जिन्हें मंजूरी मिल चुकी है।

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